बचपन........
बचपन के खेल कोई फिर से खिला दे
उम्र मेरी लेले और मुझे बच्चा बना दे।
जब कागज की कश्ती थी पानी का
किनारा था,
पानी की चाय थी झूठी-मूठी का
खाना था।
कोप भवन में जाकर अपनी बात
मनवाना था,
खेलने की मस्ती थी ये दिल भी
आवारा था ।
कहाँ आ गए इस समझदारी के
दलदल में ,
वो नादान बचपन भी कितना
प्यारा था ।
बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ
छूट गई है ,
वक्त से पहले ही वो रूठ कर दूर
चलीगई है ।
मेरे रूठे हुए बचपन को कोई मना कर
बुला दे ,
कट्टी-चुप्पी वाले दिन काश फिर मुझे
दिला दे ।
आज का दिन मंगलमय हो
ADD 1
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
हॉस्टल वार्डन के 669 पदों में भर्ती Chhatrawas Adhikshak Avm Adhikshika Ki Bharti Post 669
यदि आप स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आवासीय विद्यालय छात्रावास अधीक्षक एवं अधीक्षिका के पदों में भर्ती का इंतजार कर रहे है तो आप लोगो के लि...
-
बचपन........ बचपन के खेल कोई फिर से खिला दे उम्र मेरी लेले और मुझे बच्चा बना दे। जब कागज की कश्ती थी पानी का किनारा था, पानी क...
-
कोरोना महामारी की व्यथा कथा कुछ ऐसा रहा। अंगारो से पैर उनके जलते रहे। मजदूरों को गये सब छोड़ मालिक, भूख से पेट जलते रहे। श्रमिकों ...
-
NTA UGC NET 2022: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा UGC NET 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन का आखिरी मौका है....
3 comments:
Good writing
This is true of childhood life.
Very nice👌👌👌 😔😔😔
Post a Comment